Beautiful Essay In Hindi On Diwali – दिवाली पर निबंध

दिवाली पर निबंध – Essay In Hindi On Diwali

Essay In Hindi On Diwali
Essay In Hindi On Diwali

आज के हमारे इस लेख में हम आपके लिए दिवाली पर खूबसूरत निबंध (essay in hindi on diwali) लेकर आए हैं।

हमारे संबंध को स्कूली विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर लिखा गया है जो अगर चाहे तो इस निबंध को अपने स्कूल के प्रोजेक्ट या परीक्षा में उपयोग कर सकते हैं। हमारे वेबसाइट हिंदी मास्टर में आपको और भी कई तरह के निबंध मिलेंगे जिनका उपयोग आप पढ़ने या अपने स्कूल या कॉलेज में कर सकते हैं।

तो आइए बिना समय व्यर्थ किए हुए जान लेते हैं कि दिवाली के ऊपर खूबसूरत निबंध कैसे लिखें :-

“दिवाली पर प्रकृति को न भूलें वरना ये आपको हमेशा के लिए भूल जाएगी। अंधेरा दूर करने के लिए दीया जलाएं लेकिन प्रदूषण कम करने के लिए पटाखे न फोड़ें। पृथ्वी हमारा घर है और पर्यावरण छत है, दिवाली पर दोनों को साफ रखें। इस दिवाली पर अपने घर के साथ धरती और पर्यावरण को साफ रखने की सोचें”

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Essay In Hindi On Diwali (500- 600 words)

Essay In Hindi On Diwali
Essay In Hindi On Diwali

Essay In Hindi On Diwali – दिवाली का त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है जो पूरे भारतवर्ष में काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। हर धर्म और हर जाति के लोग इस त्यौहार को मनाते हैं। दिवाली का त्यौहार जिसे कई जगह दीपोत्सव या प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है हिंदुओं का मुख्य त्योहार भी माना जाता है।

हिंदुओं के लिए यह त्यौहार काफी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी आस्था के साथ भी जुड़ा हुआ है। हमारी पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार जब श्रीराम ने रावण के साथ युद्ध किया था और उसके बाद रावण का वध करके अपने 14 वर्ष के वनवास को पूरा करके अयोध्या वापस लौटे थे तब इस उपलक्ष में अयोध्या वासियों ने अपनी खुशियों को व्यक्त करने के लिए पूरे अयोध्या को दियो से रोशन कर दिया था। उसी दिन से दिवाली मनाने की प्रथा चली आ रही है।

दीपोत्सव का यह पावन पर्व हमेशा साल के अंतिम महीनों यानी अक्टूबर या नवंबर के बीच में मनाया जाता है। दिवाली के इस त्यौहार को दशहरा के ठीक 20 दिन बाद मनाया जाता है क्योंकि मान्यताओं के अनुसार रावण का वध करने के बाद श्री राम को अयोध्या वापस लौटने में 20 दिनों का वक्त लगा था।

दिवाली का त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है जिसका इंतजार लोग साल भर करते हैं और दिवाली आने के कुछ दिन पहले से ही अपने घरों की साफ-सफाई करनी शुरू कर देते हैं साथ ही साथ अपने घरों की दीवारों को रंग बिरंगे रंगों से सजाते हैं और ढेर सारी सजावटी लाइटें भी लगाते हैं। घर की महिलाएं दिवाली के उत्सव को मनाने के लिए खूब सारे पकवान बनाती हैं और साथ ही साथ खूबसूरत रंगोलियां भी बनाती है।

दिवाली सिर्फ एक त्यौहार नहीं है यह पांच त्योहारों का एक समूह है जिसमें सबसे पहले धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा और आखिर में भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है।

इस दिन शाम को सूर्य अस्त होने के बाद लोग अपने अपने घरों में बुद्धि और ज्ञान के देवता भगवान श्री गणेश और लक्ष्मी की देवी माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं और उनके मंत्रों का जाप करते हैं ताकि इन दोनों भगवानों की कृपा उनके परिवारों के ऊपर सदैव रहे और उनके जीवन में सुख शांति समृद्धि और सफलता आए।

बच्चों को दिवाली के इस त्यौहार का सबसे ज्यादा इंतजार रहता है क्योंकि इस त्यौहार में उन्हें पटाखे फोड़ने की आजादी होती है और साथ ही साथ ढेर सारी खुशियां अपने और अपने परिवारों के साथ मनाते हैं।

यह एक ऐसा त्यौहार है जिसके कई सारे लाभ भी हैं दिवाली के त्योहार के बहाने सारा परिवार एक साथ हो जाता है और सब को एक दूसरे से मिलने का मौका मिलता है दिवाली के त्यौहार के बहाने हमारे घर की साफ सफाई भी हो जाती है और सभी एकजुट होकर इस पावन पर्व को मनाते हैं।

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Essay In Hindi On Diwali (800 – 1000 words)

Essay In Hindi On Diwali

Essay In Hindi On Diwali – दिवाली का त्यौहार हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है या यूं कहें हिंदुओं के लिए दिवाली का त्यौहार सबसे बड़ा त्यौहार होता है। सिर्फ हिंदू ही नहीं दिवाली का त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है जिसे हर धर्म हर जाति के लोग बड़ी खुशी और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। दिवाली का यह पावन पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के माह में यानी अक्टूबर या नवंबर के बीच में मनाया जाता है।

दिवाली के इस त्यौहार को दीपोत्सव और प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है सिर्फ भारत ही नहीं विश्व में कई जगह दीवाली के त्यौहार को मनाने की प्रथा है। बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है दीवाली का यह त्यौहार।

इस त्यौहार का साल भर लोग बड़ी ही बेसब्री से इंतजार करते हैं और इस त्यौहार के आने के कुछ दिन पहले ही अपने घर की सजावट करते हैं और अपने घरों को विभिन्न प्रकार के लाइट्स और रंगों से अपने घरों को सजाते हैं। दिवाली का यह त्यौहार हिंदुओं के लिए इसलिए विशेष है क्योंकि यह उनकी आस्था के साथ भी जुड़ा हुआ है।

क्यों मनाया जाता है दिवाली का त्यौहार

दिवाली के इस त्यौहार को मनाने की प्रथा श्रीराम से जुड़ी हुई है और यही एक कारण है कि हिंदुओं के लिए यह त्यौहार काफी महत्वपूर्ण होता है। हिंदुओं के लिए यह सिर्फ एक त्यौहार ही नहीं बल्कि उनकी आस्था और विश्वास का प्रतीक होता है।

पौराणिक कथा और मान्यताओं के अनुसार जब भगवान श्रीराम ने रावण के साथ युद्ध किया और उनका वध करके युद्ध में विजय प्राप्ति की उसके बाद भगवान श्रीराम उनके भाई श्री लक्ष्मण और माता सीता के साथ जब 14 साल के वनवास को पूरा करके अयोध्या वापस लौटे तो अयोध्या वासियों ने भगवान श्री राम के स्वागत के लिए पूरे अयोध्या को भी घी के दियो से रोशन कर दिया था और उनके सम्मान और स्वागत के लिए खूबसूरत रंगोलियां भी बनाई थी।

और उसी दिन से दिवाली के इस त्यौहार को मनाने की रीत चली आ रही है। दिवाली का यह त्यौहार हर साल अक्टूबर या नवंबर के बीच कार्तिक माह में मनाया जाता है जिसमें पहले दशहरा का उत्सव मनाया जाता है और उसके 20 दिन बाद दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है क्योंकि श्री राम को रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटने में 20 दिनों का समय लगा था।

कैसे मनाई जाती है दिवाली

हमारे भारत में दिवाली के पावन पर्व को लगभग हर धर्म और हर जाति के लोग बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं। दिवाली का त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है जिसकी तैयारी कई दिनों पहले से ही शुरू हो जाती है।

लोग अपने घरों की साफ सफाई करते हैं अपने घरों की दीवारों को अलग-अलग रंगों से सजाते हैं और विभिन्न प्रकार के रंगीन लाइटें लगाते हैं। घर की महिलाएं दिवाली आने के कई दिनों पहले से ही कई सारे पकवान बनाने में जुट जाती हैं।

घर के बड़े बुजुर्ग घर के बाकी सदस्यों के लिए नए कपड़े और मिठाईयां बाजार से खरीद कर लाते हैं। सिर्फ बड़े बुजुर्ग ही नहीं दिवाली का यह त्यौहार घर के बच्चों के लिए भी काफी विशेष होता है बच्चे इस त्यौहार का इंतजार पूरे साल भर करते हैं क्योंकि इस दिन उन्हें पटाखे फोड़ने और खुशियां मनाने की पूरी आजादी होती है।

घर और समाज के सब लोग मिलजुलकर इस त्यौहार को काफी खुशी के साथ मनाते हैं इस दिन बाजारों में भी बड़ी रौनक रहती है।

किसकी पूजा होती है दिवाली में

भारत में मनाया जाने वाला हर त्यौहार किसी ना किसी देवी-देवताओं से जुड़ा होता है और उस दिन उन देवी देवताओं की पूजा अर्चना की जाती है।

हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दिवाली के दिन सूर्य अस्त होने के बाद सबसे पहले ज्ञान और बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश की पूजा अर्चना की जाती है उसके बाद धन और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि दिवाली के पावन पर्व पर भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा करने से साल भर घर के हर सदस्य के जीवन में सद्बुद्धि, ज्ञान, समृद्धि, ऐश्वर्य, स्वस्थ जीवन और धन का आगमन होता है।

भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना समाप्त होने के बाद घर के बड़े बुजुर्ग घर में प्रसाद का वितरण करते हैं और उसके बाद घर के सभी सदस्य मिलकर अपने अपने तरीकों से दिवाली के इस पावन पर्व को मनाते हैं।

बंगाल और उड़ीसा के कई इलाकों में आज भी दिवाली की मध्यरात्रि को माता काली की विशेष पूजा अर्चना करने का रिवाज है, ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन माता काली की पूजा करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

अन्य त्योहार जो दिवाली के साथ मनाया जाते हैं

दिवाली का यह त्यौहार मात्र एक त्यौहार नहीं है यह पांच त्योहारों का एक समूह है जिसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का त्यौहार होता है जिसे 5 दिनों तक मनाया जाता है और इसी वजह से दिवाली आने के पूर्व विद्यालयों और कॉलेजों में 5 से 10 दिन की छुट्टी दी जाती है।

धनतेरस

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन लोग माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं और उनसे सच्चे मन से प्रार्थना करते हैं कि उनकी कृपा उनके और उनके परिवार पर सदैव बनी रहे और उनके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और ऐश्वर्य का आगमन होता रहे। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन अगर गहनों की खरीदारी की जाए तो साल भर आपके घर में धन का आगमन होता रहता है।

धनतेरस का त्यौहार दीवाली से 2 दिन पहले आता है और इस दिन को धनत्रवदशी के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी को खुश करने के लिए उनकी विशेष पूजा अर्चना की जाती है और साथ ही साथ माता लक्ष्मी की आरती और उनके मंत्रों का भी जाप किया जाता है।

भारत में कई जगह ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान श्री गणेश की भी मूर्ति खरीदनी चाहिए और दोनों की साथ में पूजा करनी चाहिए ताकि आपके जीवन में धन के साथ-साथ सद्बुद्धि का भी आगमन हो।

नरक चतुर्दशी

दिवाली के पांच त्योहारों के इन समूह में दूसरा जो त्यौहार आता है उसे नरक चतुर्दशी कहते हैं कई जगह इसे छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। नरक चतुर्दशी में भगवान श्री कृष्ण की पूजा की जाती है क्योंकि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छोटी दीवाली के दिन घरों में मात्र 2 दिए ही जलाए जाते हैं जो आने वाले दिवाली का प्रतीक चिन्ह होते हैं।

दिवाली

दिवाली का त्यौहार जिसे दीपोत्सव और प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है 5 समूहों के तोहार में तीसरा सबसे मुख्य त्यौहार होता है। इस दिन पूरे घर को तो साफ-सुथरा किया ही जाता है पर विशेषकर जिस जगह पूजा होने वाली होती है उस जगह को साफ सुथरा करने के बाद गंगाजल का भी छिड़काव करके शुद्ध किया जाता है।

जिस जगह पूजा होने वाली होती है उस जगह को शुद्ध करके सबसे पहले एक लकड़ी का कपाट रखा जाता है और उसके ऊपर लाल रंग का वस्त्र बिछाया जाता है जिसके बाद भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर रखी जाती है।

उसके बाद भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति की साथ सजावट की जाती है उनके समक्ष पुष्प, मिठाईयां, फूल, अगरबत्ती आदि रखा जाता है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा सूर्य अस्त होने के बाद ही करना उचित होता है, ज्योतिषशास्त्र का भी मानना है कि भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा सूर्य अस्त होने से पहले नहीं होनी चाहिए।

भगवानों की पूजा अर्चना और मंत्रों का जाप करने के बाद घर के बड़े घर में प्रसाद का वितरण करते हैं उसके बाद दिवाली का त्यौहार पूरे खुशियों के साथ मनाया जाता है।

गोवर्धन पूजा

दिवाली के चौथे दिन आती है गोवर्धन पूजा और इस दिन घर के आंगन में गाय के गोबर की मदद से गोवर्धन जी की प्रतिमा बनाई जाती है जो भगवान श्री कृष्ण का प्रतीक चिन्ह है और उसके बाद उनकी पूजा-अर्चना की जाती है और उनसे कामना की जाती है कि उनका आशीर्वाद उनके परिवार के ऊपर हमेशा बनी रहे और उनके परिवार में हमेशा सुख, शांति, समृद्ध रहे।

गोवर्धन पूजा की संध्या में भी दीयों को जलाना और पटाखे फोड़ने का रिवाज है भारत में कई जगह इस दिन संध्या के समय लोग अपने घरों में दीयों को जलाते हैं और अपने घरों को रोशन करते हैं और बच्चे इस दिन दिवाली के बचे हुए पटाखों को फोड़ते हैं और खुशियां मनाते हैं।

भाई दूज

दिवाली का पांचवा और सबसे आखरी दिन जो होता है उस दिन भाई दूज का त्यौहार होता है यह त्यौहार भाई और बहन के रिश्तो का प्रतीक होता है।

इस दिन बहन अपने भाई के माथे में तिलक लगाकर उसके स्वस्थ जीवन और सफलता की कामना करती है और इसी त्यौहार के साथ ही दिवाली के इस पावन पर्व का समापन हो जाता है।

अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाते हैं दिवाली

भारत में दिवाली का त्यौहार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रीति-रिवाजों से बनाया जाता है उदाहरण के तौर पर बंगाल और उड़ीसा में दिवाली इसलिए मनाई जाती है क्योंकि इसी दिन महाकाली ने माता शक्ति का रूप धारण किया था बंगाल और उड़ीसा दोनों ही जगहों पर दिवाली के दिन लक्ष्मी जी के स्थान पर महाकाली की पूजा की जाती है।

तो वहीं दूसरी तरफ पंजाब में दिवाली इसलिए मनाई जाती है क्योंकि 1577 को  स्वर्ण मंदिर की नींव रखी गई थी और इसी दिन सिक्खों के  गुरु हरगोविंद सिंह जी को जेल से रिहा किया गया था।

अगर हम भारत के दक्षिण क्षेत्र की बात करें तो आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में दिवाली इसलिए मनाई जाती है क्योंकि द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नाम के राक्षस का वध किया था और उसी खुशी में उस दिन से आज तक दिवाली का त्यौहार मनाया जा रहा है।

विदेशों में किस तरह मनाई जाती है दिवाली

विदेशों में भी दिवाली मनाने के रीति रिवाज थोड़े अलग हैं उदाहरण के तौर पर नेपाल में दिवाली के दिन काफी शुभ माना जाता है पर उस दिन वहां पर कुत्तों को पूजा जाता है और उनकी देखभाल की जाती है और दिवाली की शाम को लोग अपने घरों को दियों से सजाते हैं और एक दूसरे के घर जाकर दिवाली की बधाई भी देते हैं।

श्रीलंका में मैं भी दिवाली का त्यौहार काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है श्रीलंका में दिवाली के दिन सुबह उठकर तेल से स्नान करने का रिवाज है, स्नान करने के बाद लोग वहां के मंदिरों में जाते हैं और भगवान की पूजा अर्चना कर से उन करके उनसे अपने उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं दिवाली की शाम को श्रीलंका में प्रायः गायन, भोज और आतिशबाजी का आयोजन किया जाता है।

निष्कर्ष

तो यह थी हमारे द्वारा पेश की गई दिवाली पर निबंध (essay in hindi on diwali). मुझे पूरी उम्मीद है कि आपको हमारे द्वारा पेश किया जाए यह निबंध पसंद आया होगा। इस निबंध को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें और हमारे Hindi Master वेबसाइट के साथ जरूर जुड़े और हमारे परिवार का हिस्सा बने।

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