Union Minister Gajendra Shekhawat Says Rajasthan Become Bastion Of Anarchy During Ashok Gehlot Tenure Ann


Rajasthan Politics: खनन माफिया के खिलाफ लड़ रहे संत विजय दास (Sant Vijay Das) की मौत को लेकर राजस्थान (Rajasthan) में सियासत गर्म है. इस मुद्दे को लेकर बीजेपी (BJP) और कांग्रेस (Congress) आमने सामने है. गहलोत सरकार ने दास की मौत की जांच के आदेश दिए हैं लेकिन मामला तूल पकड़ता जा रहा है.

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए कहा कि अपने हर पाप के लिए भारतीय जनता पार्टी को दोष देने में अशोक गहलोत जी को महारत हासिल है. गहलोत सरकार को कुंभकर्णी नींद से जगाने के लिए संत बाबा विजय दास जी को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी पर असल मुद्दे के बजाय मुख्यमंत्री मौत की परिस्थितियों की जांच प्रिंसिपल सेक्रेटरी से कराने के बहाने सच से बचने की कोशिश कर रहे हैं. आखिर क्या कारण थे, जो 9 महीने से ज्यादा समय तक गहलोत सरकार भरतपुर कलेक्टर की रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठी रही.

हिंदू आस्था के प्रतीक पहाड़ों पर हो रहा था खनन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गहलोत सरकार की निगरानी में हिंदुओं की आस्था के प्रतीक कनकालचल और आदिब्रदी पहाड़ों को अंधाधुंध तरीके से छलनी किया जा रहा था, जिसके विरोध में साधु-संत संघर्ष कर रहे थे, लेकिन अब गहलोत साहब सफाई दे रहे हैं कि वहां कोई अवैध खनन नहीं हो रहा था. लीज पर खदानें चल रही थीं, जबकि सच्चाई यह है कि वहां बड़े स्तर पर अवैध रूप से खनन हो रहा था, जिसके खिलाफ सैकड़ों एफआईआर दर्ज हैं.

शेखावत ने कहा कि मीडिया ने भी इस बात को उजागर किया है कि माफिया 60 से अधिक स्थानों पर अवैध खनन कर रहा था. मात्र 9 महीनों में 10 प्रतिशत पर्वतों को माफिया खा गया. 30 लाख टन पत्थर माफिया खोद ले गया. साधु-संतों ने सत्तारूढ़ सरकार के नेताओं और अफसरों पर खनन माफिया से गठजोड़ के गंभीर आरोप तक लगाए थे.

कलेक्टर की रिपोर्ट पर कुंडली मारकर क्यों बैठी रही गहलोत सरकार
शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि 18 जुलाई को मीडिया के माध्यम से मैंने साधु-संतों को मैसेज करा दिया था. मैं मुख्यमंत्री जी से पूछना चाहता हूं, जब 1 अक्टूबर 2021 को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने साधु-संतों और आंदोलनरत लोगों से मुलाकात कर भरोसा दिया था कि खनन को बंद कर दिया जाएगा.

2 अक्टूबर 2021 को भरतपुर कलेक्टर को जांच के आदेश दिए थे, जिसने अपनी रिपोर्ट 12 अक्टूबर 2021 को सौंप दी थी. फिर आखिर क्या कारण थे, जो 9 महीने से ज्यादा समय तक गहलोत सरकार कलेक्टर की रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठी रही. जब इतने दिनों आपकी सरकार ने कलेक्टर की रिपोर्ट पर कुछ नहीं किया तो मीडिया के माध्यम से पहुंचाए आपके संदेश पर साधु-संत कैसे भरोसा कर लेते?

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सच्चाई यह है कि अवैध खनन को रोकने में गहलोत सरकार की रुचि नहीं थी. उसके ढुलमुल रवैये ने संत बाबा विजय दास जी को आत्मदाह के लिए विवश किया. गहलोत सरकार ही संत की मौत के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है.

राजस्थान में सक्रिय हैं खनन माफिया?
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के प्रिय खान मंत्री के संरक्षण में खनन माफिया प्रदेश में काम कर रहा है. सत्ता पक्ष के विधायक चीख-चीख कर इस बात को कह रहे हैं, लेकिन जाने कौन सी मजबूरी है, लालच है, जो मुख्यमंत्री आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं या दिल्ली से कोई इशारा है.

दो दिन पहले अवैध खनन को लेकर कांग्रेस विधायक भरत सिंह मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर संत बाबा विजय दास जी की भांति आत्मदाह तक की चेतावनी दे चुके हैं. मुख्यमंत्री ने अब तक भरत सिंह जी के आरोपों का जवाब नहीं दिया है. उनका तो हर सवाल पर एक ही रटा-रटाया जवाब होता है कि भारतीय जनता पार्टी दोषी है.

युवा नेता की वजह से बचाई अपनी कुर्सी
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पिछले साढ़े तीन साल से गहलोत साहब कुर्सी कैसे बची रहे, ऐन-केन-प्रकारेण से इसी में लगे हुए हैं. अपनी पार्टी के युवा नेता के साथ उन्होंने क्या व्यवहार किया है, यह जगजाहिर है. बीएसपी के विधायकों का केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. मैं मुख्यमंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि इसमें भी क्या भारतीय जनता पार्टी का दोष है.

शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री बार-बार ईडी के दुरुपयोग का रोना रोते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी नेशनल हेराल्ड केस में जमानत पर हैं. जांच में ईडी का सहयोग करने के बजाय कांग्रेस पार्टी जो राजनीति और हंगामा खड़ा करना चाहती है, वो भी देश देख रहा है. आखिर भ्रष्टाचार के मामलों की जांच से ऐसा क्या डर है, मुख्यमंत्री जी को जवाब देना चाहिए.

गहलोत के कार्यकाल में अपराध का गढ़ बना राजस्थान
केंद्रीय मंत्री शेखावत (Gajendra Shekhawat) ने कहा कि सुशासन और शानदार परफॉर्मेंस जैसी बातें मुख्यमंत्री जी आपके मुंह से अच्छी नहीं लगतीं. बेरोजगार, युवा, किसान, माताएं-बहनें, छात्र, आमजन आपके सुशासन से परिचित हैं. प्रदेश में लूट, बलात्कार, हत्या जैसी घटनाएं रोजाना अखबारों की सुर्खियां बनती हैं. स्वास्थ्य सेवाओं (Health Services) का हाल तो यह है कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल एसएमएस (SMS) में दवाएं नहीं मिल रही हैं. डाई खत्म होने से एंजियोग्राफी (Angiography) और एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) अटक गई. बेरोजगार सड़कों पर संघर्ष कर रहा है. रीट (Reet) जैसी परीक्षाओं की व्यवस्थाओं से सब वाकिफ हैं.

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