Delhi Liquor Policy Arvind Kejriwal Govt Reduces Drinking Age Now 100 Percent Shops Are In Private Hands ANN


New Liquor Excise Policy of Delhi Government: दिल्ली सरकार (Delhi Govt) की नई आबकारी नीति (New  Excise Policy) के तहत दिल्ली (Delhi) को 32 जोन में बांटा गया है, जिसके लिए 849 लाइसेंस आवंटित किए गए हैं. इस तरह हर जोन में औसतन 26 से 27 शराब की दुकानें (Liquor Shops) खुल रही हैं. एक जोन में 8 से 9 वार्ड शामिल किए गए हैं. इस तरह हर इलाके में आसानी से शराब उपलब्‍ध हो रही है. अभी तक 60 फीसदी दुकानें सरकारी और 40 फीसदी निजी हाथों में थीं, अब 100 फीसदी दुकाने निजी हाथों में चली गयी हैं. 

दिल्ली में शराब के सेवन और बिक्री से जुड़े नियम अब इस प्रकार हैं-

  • दिल्ली में शाराब पीने की कानूनी उम्र सीमा 25 वर्ष से घटकर 21 वर्ष कर दी गई है.
  • अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर संचालित स्वंतत्र दुकान और होटल पर 24 घंटे शराब की बिक्री होगी.
  • शराब की दुकान कम से कम 500 वर्ग फीट में ही खुलेगी.
  • दुकान का कोई काउंटर सड़क की तरफ नहीं होगा.
  • अब तक अधिकांश सरकारी दुकानें 150 वर्ग फीट में थी, जिनका काउंटर सड़क की तरफ होता था.
  • लाइसेंसधारक मोबाइल एप या वेबसाइट के माध्यम से ऑर्डर लेकर शराब की होम डिलीवरी कर सकेंगे.
  • किसी छात्रावास, कार्यालय या संस्थान में शराब की डिलीवरी करने की इजाजत नहीं होगी.
  • दुकानों में व्यवस्था ऐसा की जाएगी कि एंट्री और एक्जिट गेट अलग हो. दुकानों के बाहर खाने-पीने की दुकानें नहीं होंगी. सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होगी.
  • सभी दुकानें मार्केट रेट के हिसाब से शराब की कीमत तय कर सकेगी.

यही वजह है कि कई दुकानों ने अपने हिसाब से बड़े-बड़े ऑफर देने शुरू कर दिए हैं, जैसे कि एक पर एक फ्री.

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क्यों शुरू हुआ विवाद?

दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल एक बार फिर आमरे सामने आ गए हैं. दिल्ली के उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति पर सवाल खड़े करते हुए इसकी जांच की सिफारिश सीबीआई से की है. जांच में आबकारी मंत्री मनीष सिसौदिया पर भी कई सवाल खड़े किए गए हैं. दिल्ली के उपराज्यपाल के दफ्तर से मिली जानकरी के मुताबिक, दरअसल उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने चीफ सेक्रेट्री की एक रिपोर्ट के जवाब में यह सिफारिश की है.

इसलिए एलजी ने की सीबीआई जांच की सिफारिश

दिल्ली के चीफ सेक्रेट्री ने आठ जुलाई को यह रिपोर्ट एलजी को सौंपी थी, जिसमें कहा गया है कि नई आबकारी नीति के तहत शराब लाइसेंसधारियों को पोस्ट टेंडर गलत लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर जीएनसीटीडी एक्ट 1991, व्यापार नियमों का लेनदेन (TOBR) 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 का उल्लंघन किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुख्य रूप से टॉप लेवल के पॉलिटिकल द्वारा फाइनेंशियल क्विड प्रो क्वो का संकेत है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे आबकारी विभाग के मंत्री मनीष सिसौदिया ने ही फाइनल किया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निविदाएं दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित वित्तीय सहायता दी गई, इससे राजकोष को भारी नुकसान हुआ. चीफ सेक्रेट्री की इस रिपोर्ट को उपाज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों को भेजा गया है.

बीजेपी ने केजरीवाल सरकार पर लगाए ये आरोप

बीजेपी ने इस नई नीति पर सवाल उठाते हुये कहा था कि इससे दिल्ली में शराब की दुकानें बढ़ेंगी. इस नीति में पैसे तय करने से लेकर ब्रांड तय करने के अधिकार ठेकदारों के पास होंगे. बीजेपी ने कहा था कि अगर जगह-जगह ठेके खुलेंगे तो इससे घरों में परेशानी बढ़ेगी. बीजेपी ने केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाया था कि वह रिवेन्यू के नाम पर दिल्ली को शराब के नशे में डुबोने की कोशिश कर रही है. बता दें कि दिल्ली में पहले शराब की 250 प्राइवेट दुकानें थी जो नई आबकारी नीति के बाद बढ़कर 850 हो गईं.

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